Mar 03 2026 / 11:41 AM

हिंदी अब अनिवार्य नहीं: महाराष्ट्र सरकार ने 6 दिन में पलटा फैसला

महाराष्ट्र में स्कूली छात्रों के लिए हिंदी अब ज़रूरी भाषा नहीं होगी। राज्य सरकार ने हाल ही में लिया गया फैसला बदलते हुए कहा है कि हिंदी तीसरी अनिवार्य भाषा नहीं रहेगी। शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे ने स्पष्ट किया कि राज्य के स्कूलों में मराठी पहली अनिवार्य भाषा, अंग्रेजी दूसरी और तीसरी भाषा छात्रों की पसंद पर निर्भर होगी।

क्या हुआ था 6 दिन पहले?

मात्र 6 दिन पहले, राज्य के स्कूली शिक्षा विभाग ने 1वीं से 5वीं कक्षा तक हिंदी को तीसरी अनिवार्य भाषा बनाने का एलान किया था। यह फैसला सभी मराठी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों पर लागू होने वाला था। लेकिन इसे लेकर उठी प्रतिक्रियाओं और सवालों के बाद सरकार ने निर्णय पर पुनर्विचार करते हुए अब इसे वैकल्पिक कर दिया है।

मुख्यमंत्री का बयान

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार के इस बदलाव पर पहले ही संकेत मिल गए थे। उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को कहा था कि छात्रों को तीसरी भाषा चुनने की आज़ादी होगी – यानी हिंदी अब ज़रूरी नहीं रहेगी।

नई शिक्षा नीति का असर

यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत हो रहे शैक्षणिक सुधारों का हिस्सा है। राज्य सरकार 5+3+3+4 मॉडल को फेज-वाइज लागू करने की तैयारी में है। इसका पहला चरण 2025-26 के शैक्षणिक सत्र से पहली कक्षा में शुरू किया जाएगा।

नया करिकुलम और किताबें

NEP के तहत महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड की किताबें अब NCERT के करिकुलम पर आधारित होंगी। हालांकि, लोकल कल्चर और सामाजिक संदर्भ को ध्यान में रखते हुए सोशल साइंस और भाषाओं की किताबों में राज्य-विशेष सामग्री जोड़ी जाएगी। ये किताबें बालभारती द्वारा प्रकाशित की जाएंगी, जो राज्य का अधिकृत टेक्स्टबुक ब्यूरो है।

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