करवा चौथ: जानिए चांद दिखने का समय, व्रत के नियम

करवाचौथ का व्रत महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए रखती हैं। इस दिन महिलाएं चंद्रमा की पूजा करके अपने वैवाहिक जीवन में सुख और शांति की कामना करती हैं। 17 अक्टूबर को करवाचौथ का त्योहार मनाया जाएगा। हर साल यह व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विवाहित महिलाएं इस दिन सौभाग्य प्राप्ति और पति की लंबी आयु के लिए ये व्रत करती हैं।
इस दिन महिलाएं निर्जला उपवास रहकर शाम को पूजा पाठ के बाद छलनी से चांद देखकर पति के हाथों से पानी पीती हैं और अपना व्रत खोलती हैं कई बार करवा चौथ पर चाँद निकलने के समय को लेकर महिलाओं में पशोपेश (उहापोह) रहती है। कई बार तो भूखी प्यासी होने के बावजूद चांद को देखने के लिए वो कई बार छत पर भी जाती हैं ताकि सही समय पर व्रत खोला जा सके आपको चांद देखने के लिए ज्यादा परेशान न होना पड़े।
इसलिए यहां देखें किस समय उदय होगा आसमान में चांद-
करवा चौथ का चंद्रोदय-
शाम 7 बजकर 58 मिनट पर चांद का उदय होगा। इसी समय चंद्र देव को अर्घ्य देने का शुभ समय होगा।
करवाचौथ व्रत के नियम और सावधानियां-
- केवल सुहागिनें या जिनका रिश्ता तय हो गया हो वही स्त्रियां ये व्रत रख सकती हैं।
- ये व्रत निर्जल या केवल जल ग्रहण करके ही रखना चाहिए।
- व्रत रखने वाली कोई भी महिला काला या सफेद वस्त्र कतई न पहनें।
- इस व्रत के लिए लाल वस्त्र सबसे उत्तम माना गया है, पीला वस्त्र भी पहना जा सकता है।
- आज के दिन महिलाओं को पूरे 16 श्रृंगार करने चाहिए।
- अगर कोई महिला अस्वस्थ है तो उसकी जगह उसके पति ये व्रत कर सकते हैं।
- व्रत की कथा पूरे मन से सुनें और इस दौरान किसी दूसरे से बातें न करें।
- चांद देखने के बाद मां गौरी की पूजा करें और भगवान को पूरी-हलवा के प्रसाद का भोग लगाएं।
- पूरे नियम से ये पर्व मनाने से महिलाओं का सौंदर्य भी बढ़ता है।
- करवाचौथ के दिन पति के साथ भूलकर भी लड़ाई ना करें।
इस साल का करवा चौथ बेहद शुभ समय में पड़ रहा है। यह योग 70 साल बाद बन रहा है। इस शुभ समय में चंद्र देव अपनी प्रिय पत्नी रोहिणी के साथ उदय होंगे अर्थात रोहिणी नक्षण में चंद्रमा का उदय होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ये एक बेहद शुभ योग है और ऐसा योग कई सालों बाद बनता है।