क्यों मनाई जाती हैं रंगपंचमी

होली का त्योहार एक नई शुरुवात, मित्रता एवम बंधुभाव का प्रतिक है। अपनी बुराईयों को जलाकर नेकी की राह पर चलने का संदेश देती हैं। होली के दिन गीले-शिकवे और दुश्मनी भुलाकर मनोमिलन कर आगे बढ़ने का रिवाज है। होली वसंत ऋतु में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण भारतीय त्योहार है। रंगपंचमी होली का एक हिस्सा हैं। होली के ठीक पांच दिन बाद रंगपंचमी का पर्व मनाया जाता हैं।
यह त्योहार हिंदू कैलेंडर के अनुसार फाल्गुन माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। रंगों के इस त्योहार को पारंपरिक रूप से दो दिन मनाते हैं। पहले दिन होली जलाई जाती है और दूसरे दिन एक दूसरे को रंग लगाकर रंगो की होली खेली जाती हैं, जिसे धूलिवंदन भी कहते हैं। रंगपंचमी को एक दूसरे को रंग लगाना, सभी को एकजुट करने तथा भाईचारे और एकता के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। रंगपंचमी का त्यौहार मथुरा, वृंदावन, इंदौर, जयपुर, उदयपुर और गुजरात के द्वारका में बड़े हर्षोल्लास से मनाया जाता हैं।
रंगपंचमी क्या हैं?
फाल्गुन पूर्णिमा की रात होलिका दहन के बाद दूसरे दिन सभी लोग रंगों से त्यौहार मनाते हैं। रंगों का यह पर्व चैत्र मास की कृष्ण प्रतिपदा से लेकर पंचमी तक चलता हैं। इसलिए इस पर्व को रंगपंचमी कहते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार रंगपंचमी के दिन वातावरण में फैले गुलाल के तरंगों से सकारात्मक संयोग बनता हैं। इस दिन लोगों को गुलाल के रंग कणों में संबंधित देवी-देवताओं के स्पर्श की अनुभूति होती हैं। यह पर्व अपनेपन का अहसास दिलाता हैं।
रंगपंचमी का महत्त्व
रंगपंचमी मानाने के पीछे कई आध्यात्मिक मान्यताएं हैं इस दिन एक-दूसरे को रंग लगाकर गुलाल को हवा में उड़ाया जाता हैं. ऐसा मानना हैं की गुलाल हवा में उड़ाने से देवी-देवता आकर्षित होकर प्रसन्न होते हैं। इस त्यौहार की एक ओर मान्यता है कि, गुलाल हवा में उड़ाने के बाद वातावरण में फ़ैल जाता हैं। जिससे व्यक्ति के तामसिक और राजसिक प्रवृत्तियां लुप्त हो जाती हैं और व्यक्ति के सात्विक गुणों में वृद्धि होती हैं।
रंगों का महत्व
मानवी जीवन में रंगों को बहुत महत्त्व दिया जाता हैं। हर रंग का अपना महत्त्व हैं। जैसे कि, नीला, हरा और हल्के रंग को सात्विक प्रकृति के रूप में जाना जाता है। इन सभी रंगों को खुशी, ज्ञान और स्पष्टता का प्रतीक माना जाता है। ये रंग मानवीय संवेदनशीलता और सक्रियता को बढ़ाने में मदद करते हैं। तो काला और पीला रंग तामसिक प्रवृत्तियों के रूप में भी जाना जाता है।
गहरा लाल रंग – प्रसिद्धि प्रदान करता है।
सफेद रंग – मन में भविष्य के सुनहरे सपनों को जागृत करता हैं।
नारंगी रंग – मंगल का रंग हैं। साथ ही आग और आक्रामकता का प्रतीक हैं।
पीला रंग – यह शुद्धता और सादगी का प्रतीक है।
हरा रंग – बुध का रंग हैं। और इसे अपने अस्तित्व का प्रतीक माना जाता हैं।
नीला रंग – शनि ग्रह से संबंधित हैं और विकास और संतुष्टि का प्रतिनिधित्व करता है।
गहरे रंग – ऐसे रंग राहु ग्रह से जुड़े होते हैं।
चंदेरी रंग – केतु ग्रह का पसंदीदा माना जाता हैं।