जिसने जन्म लिया है उसका मरना तय है। जीव के जन्म से पहले ही उसका जन्म और मरण फिक्स हो जाता है। लेकिन मौत को लेकर लोग हमेशा चिंतित से रहते हैं। हर एक समस्या का कोई न कोई समाधान तो अवश्य हो�
माघ महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी कहा जाता है। इस दिन का धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भारतीय समाज में काफी महत्व रहा है। पौराणिक मान्यता के अनुसार बसंत पंचमी के �
हिंदू धर्म में स्नान, दान और ध्यान का बड़ा महत्व होता है। बता दें कि 24 जनवरी को माघ मास की अमावस्या तिथि है जिसे मौनी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। ज्योतिष के अनुसार इस दिन पवित्र सं�
कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी के दिन प्रदोष व्रत होता है। प्रदोष व्रत संतान, सुख-समृद्धि और पाप से मुक्ति के लिए किया जाता है। प्रदोष व्रत पूजा यदि नियम और विधि के अनुसार न की जाए तो
मकर संक्रांति 2020- 15 जनवरी
संक्रांति काल- 07:19 बजे (15 जनवरी)
पुण्यकाल-07:19 से 12:31 बजे तक
महापुण्य काल- 07:19 से 09: 03 बजे तक
संक्रांति स्नान- प्रात: काल, 15 जनवरी 2020
दरअसल, इस साल 15
मंगलवार का दिन पवन पुत्र श्री हनुमान जी को समर्पित है। आज के दिन हनुमान जी से जुड़े उपाय करने से सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं। फिर चाहें, भूत-प्रेत का भय हो, साहस की कमी हो, बौद्धिक
कर्क
कर्क राशि के जातकों के लिए यह सूर्य ग्रहण शुभ साबित हो सकता है। कर्क राशि के जातक अगर ग्रहण के दौरान धैर्य के साथ अपना कार्य करेंगे तो इन्हें निश्चित ही लाभ होगा।
सफला एकादशी का व्रत पौष माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी को किया जाता है और यह व्रत समस्त कार्यों में सफल होने का फल देता है इसलिए इसे सफला एकादशी व्रत कहा जाता है। इस व्रत के पुण्य से मनुष्
शनिवार का दिन शनिदेव को समर्पित है। यदि शनिदेव कुपित हैं या जिन पर साढ़े साती या ढैय्या चल रही हो, उन्हें शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा के साथ हनुमान जी की पूजा भी जरूर करनी चाहिए। साथ ह
इस वर्ष 8 दिसंबर 2019, मंगलवार को मोक्षदा एकादशी मनाई जा रही है। मार्गशीर्ष माह में शुक्ल पक्ष को आने वाली एकादशी मनुष्य को जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्त कराती है। इस व्रत को धारण करने वाल